मेरी रानी की कहानी-1

(Meri Rani Ki Kahani- Part 1)

मैं आपका दोस्त आशु हिसार से आज अपनी जिंदगी का एक और किस्सा लेकर हाजिर हुआ हूँ।
मेरी पिछली कहानियों को काफी सराहना मिली। एक मोहतरमा का कहना था कि उन्हें मेरी कहानी सच नहीं लगी। मेरा कहना है कि मैं अपने अहसास लिखता हूँ, अगर आप सिर्फ अल्फ़ाज़ पढ़ेंगे तो मज़ा कहाँ से आएगा।

तो चलिए दोस्तो, ज्यादा घुमा कर क्या फायदा, सीधे मुद्दे पे आते हैं। आज की कहानी थोड़ी बोरिंग लग सकती है, लेकिन मेरा वादा है अगर आप वक़्त निकाल कर मेरी कहानी पर विचार करेंगे तो आपको बड़ा मजा आने वाला है।

दरअसल यह कहानी सोनू की कहानी का प्रीक्वल है। मतलब जहाँ यह कहानी खत्म होती है, उससे थोड़ा सा पहले सोनू की कहानी शुरू होती है।
अब आप यह सोच रहे होंगे कि तो ये कहानी मैंने पहले क्यों नहीं लिखी?
दोस्तों इस के कई कारण हैं:
सबसे पहला तो यह कि सोनू की कहानी और क़िस्से मैंने सोनू से इजाजत लेकर लिखे लेकिन इस कहानी की जो नायिका है, मान लीजिए उसका नाम रानी है, उनसे मेरी बात और मुलाक़ात सोनू की कहानी के साथ ही खत्म हुई थी। फर्क इतना है कि सोनू और मैं अलग हुए तो एक खुशनुमा अहसास के साथ अलग हुए, दिलों में प्यार ले कर अलग हुए, लेकिन रानी मुझसे अलग हुई तो नफरत ले कर अलग हुई।
हालांकि रानी के लिए मेरे दिन में अभी भी प्यार और स्नेह ही है। वो जहाँ भी रहे खुश रहे, मेरे दिल से उस के लिए यही दुआ निकलती है।

साहब जगजीत सिंह जी की एक गजल है जो रानी को बेहद पसंद थी, मैं हमेशा उसे रात को लोरी की तरह गुनगुनाकर सुलाया करता था।
‘एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है,
जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है…’

आज भी उन पलों को याद करता हूँ तो यह गजल गुनगुना लेता हूँ, यादें ताजा हो जाती हैं. आप को भी अगर गजलें पसंद हों तो इस ग़ज़ल को सुनते हुए मेरी कहानी का आनन्द लीजिएगा।

तो चलिए जनाब शुरू करते हैं:

यह कहानी शुरू हुई थी जब मैंने नया नया पढ़ाना शुरू किया था। मैं अपने से एक क्लास छोटे वालों को पढ़ाया करता था। माने कि जब मैं फर्स्ट ईयर में था तो 12वीं वालो को पढ़ाता था। उनमें से एक लड़की थी गीता।
एक नंबर की बोल्ड जाटनी लड़की … पढ़ाई में औसत, शक्ल सूरत में खूबसूरत और व्यवहार में कुशल लेकिन बोल्ड।

गीता के पापा एक मशहूर हस्ती रहे हैं अपने जमाने के, राष्ट्रीय स्तर के। आजकल गुमनाम सी जिंदगी बिता रहे हैं। गीता से वैसे अभी मेरी कोई बातचीत नहीं होती लेकिन इतना पता लगा था कि विदेश में कहीं सेटल्ड है लव मैरिज के बाद।

हुआ यह था कि गीता मेरे पास 11वीं से पढ़ती थी। छोटी छोटी शरारतें और छोटे छोटे किस्से तो काफी है। लेकिन वो फिर कभी। आज की कहानी और किस्से रानी के नाम!

गीता जब फर्स्ट ईयर में हुई तो मैं सेकंड ईयर में हुआ। गीता ने हिसार के एक नामी कॉलेज में एडमिशन लिया। चलो बता देता हूँ यार … जाट कॉलेज में। हालांकि उसके मार्क्स नहीं थे इतने लेकिन जैसे कि मैंने बताया उसके पिताजी का इतना रुतबा तो आज भी है।

जाट कॉलेज में ही गीता और रानी की मुलाक़ात हुई, दोनों के व्यवहार मिले तो दोस्ती हो गई।

गीता मेरे पास फर्स्ट ईयर का पढ़ने आने लगी, उसके साथ रानी भी आने लगी। अब मेरी और उन की उम्र में मुश्किल से एक से दो साल का फर्क था। गीता मुझे भईया बुलाती थी तो रानी सर। धीरे धीरे दोनों सर ही बोलने लगी।

अब हुआ यह कि मैंने अपना कैरियर नया नया ही शुरू किया था, तो मेरे पास उस वक़्त फर्स्ट ईयर के ज्यादा छात्र नहीं आते थे। कॉलेज में स्टूडेंट्स थोड़ा लेट ही पढ़ना शुरू करते हैं लेकिन ये दोनों कॉलेज शुरू होने के साथ ही आने लगी थी। तो क्लास में सिर्फ दो यहीं लड़कियां हुआ करती थी। समय की किसी के पास कमी नहीं थी। क्लास में तबीयत से दोनों पढ़ती और जी भर शरारतें करती। दोनों ही अच्छे पढ़े लिखे और कमाई वाले परिवार से आती थी तो दोनों के पास उनकी जरूरत से ज्यादा पैसे हुआ करते थे। खाने का कुछ न कुछ सामान दोनों के बैग में होता ही था।

उस वक़्त मैं एक लड़की की सच्ची मोहब्बत में गुम रहता था। सच्ची लेकिन एकतरफा मोहब्बत। नया नया जवान हुआ था, हाथ में जरूरत भर पैसे, हसीन सपने, दोस्त और खूब सारा वक़्त, न कोई जिम्मेदारी … 18-20 साल के लड़के को जो चाहिए होता है वो सब था मेरे पास।

अब क्या होता है कि लड़कियां अपने पापा और पुरुष अध्यापकों की तरफ सॉफ्ट कार्नर रखती हैं और लड़के माँ और महिला अध्यापकों की तरफ। इसे विपरीत लिंग का आकर्षण कह सकते हैं।
तो रानी और गीता को कहीं से चुल्ल उठी कि पता किया जाए मेरी सहेली कौन है?
अरे सहेली मतलब प्रेमिका…

बात बातों में मेरे से पूछती, मेरे फोन में चेक करती। अब उस वक़्त मल्टीमीडिया फ़ोन इतने सस्ते नहीं थे कि एक 20 साल का लड़का अपनी ट्यूशन की कमाई से खरीद सके। मेरे पास नोकिया 2320 हुआ करता था। उसमें ऐसा कोई सुराग उन्हें मिला नहीं। बेचारी दोनों लड़कियाँ मेहनत करती कि कहीं से तो उन्हें पता लगे मेरी सहेली का … लेकिन सब व्यर्थ।

यूँ ही एक साल गुजर गया, वो अब सेकंड ईयर में हो गई और मैं फाइनल ईयर में। रानी ने कॉलेज के साथ साथ एम बी ए एंट्रेंस की तैयारी शुरू कर दी और गीता ने टोफेल की। दोनों लड़कियों ने गम्भीरता से पढ़ाई करनी शुरू कर दी थी और अपने खाली समय में उन्होंने यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में जाना शुरू कर दिया।

यहाँ से कहानी ने टर्न लिया।

यूनिवर्सिटी में उनकी मुलाकात मेरे कॉलेज की मेरी क्लास की एक लड़की से हुई। उसका नाम मीना रख देते हैं। मीना भी एम बी ए एंट्रेंस की तैयारी कर रही थी और रानी भी। दोनों का इंस्टिट्यूट एक था लेकिन बैच अलग अलग। उनमें जान पहचान हुई, दोस्ती हो गई।
मीना से दोस्ती होने के बाद उनके दिमाग के घोड़े जो मेरी सहेली का पता लगाते लगाते हार कर थक कर बैठ गए थे, वो फिर से खड़े हो गए। उन्हें एक जासूस मिल गया था मदद के लिए।

उन्होंने बातों बातों में मीना से पता करना शुरू किया लेकिन मीना मुझे जानती नहीं थी। एक तो मैं कॉलेज जाता बहुत कम था और जाता भी था तो कॉलेज में मेरा अस्तित्व भी है किसी को पता नहीं होता था। गिनती के दो चार दोस्त होते थे, चुपचाप क्लास लगा के आ जाता था। लेकिन फाइनल ईयर होने की वजह से कॉलेज में अटेंडेंस की वजह से थोड़ा रेगुलर जाना पड़ता था।

एक दिन मेरे एक दोस्त ने मीना से मेरा परिचय कराया। तब मैं मीना की नजर में आया और उसने जाकर दोनों लड़कियों को बोला कि अब वो मुझे पहचानती है।
मीना ने कहा- सीधा सा लड़का है, क्लास में आता है और चुपचाप चला जाता है। मुझे नहीं लगता कि उसकी कोई गर्लफ्रेंड होगी।

लेकिन इतना नजदीक आने के बाद लड़कियां हार कैसे मान लेती? ऊपर जा के भगवान जी को मुंह दिखाना है या नहीं?
उन्होंने मीना को मेरे ऊपर नजर रखने को बोला.

मीना को पता नहीं कब मैं हमारी क्लास की एक लड़की के साथ बात करता हुआ दिख गया। संयोग से उस लड़की और मेरी सहेली, दोनों का नाम अंग्रेजी के ‘पी’ से शुरू होता था।

दोनों लड़कियों के लिए तो ये मैदानी जंग जीतने जैसा था। अब बस किला फतेह करना बाकी था। दोनों ने आकर मेरे सामने कॉपी पे ‘पी’ लिख दिया। मैं हैरान हो गया इन्हें कैसे पता चला। हालांकि पता उन्हें नहीं चला था लेकिन चोर की दाढ़ी में तिनका … ‘पी’ सामने आते ही मैं भी सोच में पड़ गया।

अब उन्हें पक्का विश्वास हो गया, दोनों ने मेरे मजे लेने शुरू कर दिए, पार्टी की डिमांड शुरू हो गई।
ऐसे ही समय चलता रहा। फिर किसी बात पर गीता और रानी की लड़ाई हो गई। और ऐसी हुई कि एक साथ ट्यूशन आने से मना कर दिया। तब तक मेरे पास अच्छे स्टूडेंट्स आने लगे थे और मैंने दोनों को अलग अलग टाइम दे दिया।

यहाँ से कहानी में गीता का रोल खत्म हो जाता है।

रानी खाली समय में मेरे पास बैठ के ही पढ़ा करती थी। हमारे बीच दोस्ती थोड़ी बढ़ती चली गई। मेरा भी फाइनल ईयर था तो मैं भी अकैडमी पर बैठ कर ही पढ़ा करता था। कुछ और स्टूडेंट्स भी पढ़ते थे लेकिन वो सब जल्दी ही चले जाते थे, सबसे आखिर में रानी ही निकला करती थी।

कुल मिला के हर रोज 3 से 4 घंटे मैं और रानी दोनों मेरे क्लास में बैठ कर पढ़ा करते थे। मेरी लाइफ का तब थोड़ा टफ टाइम चल रहा था। कुछ परिवार की टेंशन और कुछ पढ़ाई और काम का बोझ। फिर सबसे बड़ी चोट लगी मेरा ब्रेक अप। मेरा और ‘पी’ का ब्रेकअप हो गया। मेरे लिए ये बहुत ज़्यादा शर्मनाक था। मेरे सभी दोस्तों को पता था और सभी मुझे कहते थे कि वो मेरे लिए या मेरे लायक नहीं है।

मैंने सभी को अनसुना कर दिया था, यहाँ तक कि मेरी सगी बड़ी बहन ने भी मुझे इस रिश्ते में गम्भीर होने से रोका था। लेकिन कहते हैं ना प्यार अंधा होता है और एकतरफा प्यार करने वाला चूतिया।
यहाँ वो चूतिया मैं था.

मुझे अब किसी से बात करने में भी शर्म आती थी। इस मोड़ पर रानी ने मुझे संभाला, उसने मुझे जीना सिखाया।
मुझे फैशन के बारे में समझाती, मुझे नए नए तरीके बताती। आज मेरा जो व्यक्तित्व है, उसमें रानी का बहुत बड़ा रोल है। उसने कई बार मेरी मदद आर्थिक रूप से भी की।

मेरा कॉलेज खत्म हो गया था और अब मैं पूरी तरह से टीचिंग में आ गया। रानी अपने साथ अपनी क्लास के कई स्टूडेंट्स को मेरे पास लेकर आई। काम चल पड़ा था। धीरे धीरे सब सही होता जा रहा था।
ऐसे ही चलता रहा और मैं और रानी एक दूसरे के करीब आते गए। हर रोज रात को हमारे बीच घंटों तक चैटिंग होती। हमारा रिश्ता एकदम पाक साफ दोस्ती का था। कभी कोई गलत ख्याल और कोई ऐसी वैसी बात नहीं। सिर्फ शरारतें और प्यारी प्यारी बातें। मुझे वो बहुत अच्छी लगती थी और आज भी लगती हैं।

एक दिन हमारी बातों ने एक अजीब सा मोड़ ले लिया। जैसे कई लड़कियों को लड़कों की भूमिका में बोलने का शौक होता है ना जैसे कि मैं करूँगा, मैं खाऊंगा वगैरह वगैरह … रानी भी ऐसे ही बोलती थी।
एक दिन किसी बात पे उस से किसी ने बोल दिया कि तुम तो अभी बच्ची हो। इस बात स वो चिढ़ गई। और तो कहीं जोर चला नहीं, जैसे ही मेरे से बात हुई मेरे पे चढ़ गई राशन पानी ले के।

वो मुझे एक खास नाम से बुलाती थी, उस नाम से बस वही मुझे बुला सकती है। इसलिए मैंने वो आज तक किसी को नहीं बताया। वास्तव में रानी और मेरे रिश्ते के बारे में मेरे और रानी के सिवा कोई नहीं जानता।

उसने मुझ से पूछा- क्या आपको भी मैं बच्चा ही लगता हूँ?
मैंने कहा- तू कहाँ बच्चा, तू तो मेरी माँ हो रखी है!
वो बोली- मजाक नहीं, सीरियसली बताओ?
मैं थोड़ा गम्भीर होकर बोला- क्या बात हुई, पहले ये बता?
वो बोली- ऐसे कौन से काम है जो मैं नहीं कर सकता। जो सारे काम सब लोग करते है, मैं भी कर सकता हूँ और कई सारे तो करता भी हूँ.
मैंने कहा- ओह्ह जे बात!
उसने कहा- हाँ जी जेही बात!

मैंने कहा- देख ऐसा है, ऐसे तो मेरा लड्डू सारे काम करता है। लेकिन कुछ काम ऐसे होते हैं जो अलग अलग उम्र के बाद ही किए जाते हैं। जब तक आप उस उम्र तक नहीं पहुँचते जिससे कि वो काम जुड़ा है तब तक आप उस काम के लिए बच्चे हो और बाकी कामों के लिए बड़े!
अब जाहिर है कि य जवाब उस वक़्त मुझे हैं नहीं समझ आया था तो उसे तो क्या ही समझ आया होगा?

ऐसे मैंने बात टालने की कोशिश की लेकिन वो टलने वालों में से थी ही नहीं। उसने इस बात का पीछा नहीं छोड़ा।

एक दिन मैंने ऐसे ही बोल दिया- बड़े किस करते हैं, छोटे बच्चे नहीं करते।
यह कहना था और मैंने आफत मोल ले कर गले में डाल ली। अब वो शुरू हो गई- मुझे किस करना है।
मैंने समझा कि मजाक कर रही है। लेकिन वो तो पता नहीं क्या चल रहा था उसके दिमाग में।

उसकी एक क्लासमेट हुआ करती थी, काफी मॉडर्न थी, उसके बॉयफ्रेंड भी रहे थे और वो खेली खाई लड़की थी। वो भी मेरे पास ही आती थी पढ़ने लेकिन उसका नाम याद नहीं मुझे।

रानी उसका नाम लेकर बोली- अगर वो कर सकती है तो मैं भी कर सकती हूँ। आखिर हम एक ही क्लास में हैं और मैं उससे ज्यादा समझदार हूँ.
मैंने कहा- वो तो अपने बॉयफ्रेंड को करती है। तू भी बना ले कोई बॉयफ्रेंड और कर ले जो तेरा मन करे फिर..

दोस्तो, इस वक़्त तक मेरे मन में रानी के बारे में कोई गलत ख्याल नहीं आया था। लेकिन इसके बाद सब कुछ बदल गया, सब उल्टा पुल्टा हो गया।
रानी ने किस करने की जिद पकड़ ली थी। बस एक ही बात कि, मैंने किस करनी है और आप के सिवा मैं किसी पे ट्रस्ट नहीं करती।

मैंने लाख समझाया लेकिन ऐसा लगता था जैसे किसी ने उस पे टोटका कर दिया हो। हमारी बात इसी लड़ाई से शुरू होती और इसी पे लड़ते लड़ते सो जाते। दिमाग खराब रहने लगा था मेरा तो, उसका तो हो ही गया था खराब।

एक दिन उसने कहा कि अगर मैं उसकी बात नहीं मानूंगा तो वो मुझ से बात नहीं करेगी। मुझे लगा कोई ना ये कोशिश भी करके देख लेते हैं। मुझे ऐसा लगता था कि वो मेरे से बात किये बिना रह ही नहीं पाएगी और अपनी जिद छोड़ देगी।

लगातार 5 दिन तक हमारी कोई भी बात नहीं हुई। कहाँ मैं उसे लोरी गाकर सुलाता था और अब वो गुड मॉर्निंग या गुड नाईट का रिप्लाई भी नहीं कर रही थी।
आखिरकार मैं ही हिम्मत हार गया। मुझे ही उससे कहना पड़ा- ठीक है, मैं तैयार हूँ.
वो बहुत खुश हुई और बोली- कल सुबह आपकी पहली क्लास से एक घंटा पहले आऊंगी, फ्री रहना!

मेरे साथ अजीब सा हो रखा था, एक्साइटमेन्ट के साथ साथ गंदा सा भी लग रहा था। और सबसे बड़ी मुश्किल कि मैं किसी से इस बारे में बात भी नहीं कर सकता था। मेरे सब दोस्त रानी के बारे में और उसके बारे में मेरी फीलिंग्स के बारे में जानते थे। मैं रानी को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता था लेकिन इस तरह से कभी उसके बारे में कभी कोई ख्याल मन में आया ही नहीं था। असल में ऐसा ख्याल कभी किसी लड़की के बारे में नहीं आया था। मैं एकदम सीधा सादा और दब्बू किस्म का लड़का हुआ करता था, संस्कारी भी और डरपोक भी। लड़की वगेरह के मसलों से डर लगता था, कहीं बनी बनाई इज्जत मिट्टी में न मिल जाये।

वक़्त कहाँ किसी के लिए रुकता है, डरते डरते अगला दिन भी आया। मेरी पहली क्लास सुबह 7:30 होती थी। मैं 6:30 बजे के आस पास अकैडमी पंहुचा तो रानी वहाँ पहले से अपनी स्कूटी पर बैठी थी। मेरा चेहरा मुरझाया से था और उसके चेहरे पे लाली।

हम अंदर मेरे आफिस में बैठे, मैंने आखिरी कोशिश की उसे समझाने की, मैंने कहा- ये गलत है। तेरा मेरा रिश्ता इसकी परमिशन नहीं देता।
वो बोली- गलत तो आप 5 दिन से कर रहे हो मेरे साथ। मैं 5 दिन से रोती रही और आपने मुझे चुप भी नहीं कराया और आप तो कहते हो कि मेरी खुशी के लिए कुछ भी करोगे। आज मैंने कुछ कहा तो आप मना कर रहे हो.

उसकी आंखों में आंसू थे और मेरी आँखों में भी। मुझ से देखा नहीं गया। मैंने आगे बढ़कर उस के आंसू पी लिए और उसे कस के गले लगा लिया। कुछ मिनट के बाद हम अलग हुए, वो मेरे सामने खड़ी थी, उसकी आँखें बंद थी चुम्बन का मूक निमंत्रण और सहमति।

मैंने उसके चेहरे को जी भर कर देखा, ऐसा लग रहा था कि जैसे वो रोमांचित और खुश हो रही हो, आने वाले पल की कल्पना करके! मैंने धीरे से अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और हल्के से
किस किया और हट गया।
मुझे लगा कि वो बस इसी से वो मान जाएगी। लेकिन उसने आँखें खोली और ऐसे भाव दिए अपने चेहरे जैसे किसी से बच्चे के हाथ से खिलौना छीन लिया हो।

अबकी बार उस ने आगे बढ़ कर मेरे होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लिया। हम एक दूसरे को किस कर रहे थे।
धीरे धीरे मैं भी होश खो बैठा। रिश्ते की शर्म की जो दीवार थी वो अब ढह चुकी थी।

किसी लड़की को चूमने का यह मेरा पहला एक्सपीरिएंस था और वो लड़की भी रानी जैसी प्यारी और अनछूई लड़की। रानी जिसे मैं बेतहाशा प्यार करता था, आज उसे मैं किस कर रहा था। मुझे याद नहीं कि हमने कैसे कैसे और कितनी देर किस किया।
हम दोनों ही अनाड़ी थे … बस किस किये जा रहे थे। किस करते करते हमारी सांसें भारी होने लगी तो मैंने रानी को मेज पर लिटा दिया और ऊपर से मैं उसे चुम्बन करता रहा। हमें कोई होश नहीं था, हम दोनों ही हवा में उड़ रहे थे। पता नहीं कितने मिनट के बाद पैन्ट में ही मेरा स्खलन हो गया। रानी का भी हुआ ही होगा, हालांकि हमारी ऐसी कोई बात नहीं हुई।

हम एक दूसरे से अलग हुए तो हमारी सांसें जोर जोर से चल रही थी। मैं कुर्सी पर बैठा था और रानी अभी भी मेज पर लेटी हुई थी।

दोस्तो, उस दिन समझ आया कि वासना भी प्यार का ही एक हिस्सा है।

हम एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे। रानी उठ कर मेज पर ही मेरी तरफ पैर लटका कर बैठ गई। मैंने अपना सर रानी की गोद में रख लिया। मुझे बहुत सुकून लग रहा था। रानी मेरे बालों में हाथ फिरा रही थी। ऐसा मन कर रहा था कि वक़्त यहीं रुक जाए और हम ऐसे ही बैठे रहें। हमारे बीच खामोशी से बातें हो रही थी।

कुछ देर बाद अहसास हुआ कि स्टूडेंट्स आने वाले हैं तो हम अलग होकर बैठ गए। रानी ने अपनी किताबें निकाल कर मेज पर रख ली थी।
एक दो स्टूडेंट्स के आने के बाद रानी चली गई। मेरा भी पढ़ाने का मन नहीं कर रहा था। उस दिन बैठे बैठे टेबल पर ही पढ़ाया, खड़े होकर नहीं पढ़ा सकता था, आप समझ ही गए होंगे कि क्यों?

लगभग आधे घंटे बाद तबीयत खराब का बहाना बना कर मैंने उन्हें भी फ्री कर दिया। उसके बाद मैं भी घर आकर सो गया।

करीब 3 घंटे की गहरी नींद के बाद जब उठा तो फोन में रानी के कई सारे मैसेज आये पड़े थे। थैंक्स, लव यू और चुम्बनों से भरे हुए!
मैंने उसे उसी के अनुरूप उत्तर दिया.

उसके बाद हमारे बीच चुम्बन का सिलसिला आम हो गया था। जब भी हम फ्री होते, हमें एकांत मिलता हमारे होंठ आपस में जुड़ जाते।

कहानी जारी रहेगी.

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